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Yoga In Hindi Essay On Environment

जीवन में योग का महत्व निबंध। Essay on importance of yoga in hindi

प्रस्तावनाः योगासन शरीर और मन को स्वस्थ रखने की प्राचीन भारतीय प्रणाली है। शरीर को किसी ऐसे आसन या स्थिति में रखना जिससे स्थिरता और सुख का अनुभव हो योगासन कहलाता है। योगासन शरीर की आन्तरिक प्रणाली को गतिशील करता है। इससे रक्त-नलिकाएँ साफ होती हैं तथा प्रत्येक अंग में शुद्ध वायु का संचार होता है जिससे उनमें स्फूर्ति आती है। परिणामतः व्यक्ति में उत्साह और कार्य-क्षमता का विकास होता है तथा एकाग्रता आती है।

योग का अर्थः योग¸ संस्कृत के यज् धातु से बना है जिसका अर्थ है संचालित करना¸ सम्बद्ध करना¸ सम्मिलित करना अथवा जोड़ना। अर्थ के अनुसार विवेचन किया जाए तो शरीर एवं आत्मा का मिलन ही योग कहलाता है। यह भारत के छः दर्शनों जिन्हें षड्दर्शन कहा जाता है¸ में से एक है। अन्य दर्शन हैं-न्याय¸ वैशेषिक¸ सांख्य¸ वेदान्त एवं मीमांसा। इसकी उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 ई0 पू0 में हुई थी। पहले यह विद्या गुरू-शिष्य परम्परा के तहत पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी को हस्तांतरित होती थी। लगभग 200 ई0पू0 में महर्षि पतंजलि ने योग-दर्शन को योग-सूत्र नामक ग्रन्थ के रूप में लिखित रूप में प्रस्तुत किया। इसलिए महर्षि पतंजलि को ‘योग का प्रणेता’ कहा जाता है। आज बाबा रामदेव योग नामक इस अचूक विद्या का देश-विदेश में प्रचार कर रहे हैं।

योग की आवश्यकताः शरीर के स्वस्थ रहने पर ही मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। मस्तिष्क से ही शरीर की समस्त क्रियाओं का संचालन होता है। इसके स्वस्थ और तनावमुक्त होने पर ही शरीर की सारी क्रियाएँ भली प्रकार से सम्पन्न होती हैं। इस प्रकार हमारे शारीरिक¸ मानसिक¸ बौद्धिक और आत्मिक विकास के लिए योगासन अति आवश्यक है।

हमारा ह्रदय निरन्तर कार्य करता है। हमारे थककर आराम करने या रात को सोने के समय भी ह्रदय गतिशील रहता है। ह्रदय प्रतिदिन लगभग 8000 लीटर रक्त को पम्प करता है। उसकी यह क्रिया जीवन भर चलती रहती है। यदि हमारी रक्त-नलिकाएँ साफ होंगी तो ह्रदय को अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। इससे ह्रदय स्वस्थ रहेगा और शरीर के अन्य भागों को शुद्ध रक्त मिल पाएगा जिससे नीरोग व सबल हो जाएँगे। फलतः व्यक्ति की कार्य-क्षमता भी बढ़ जाएगी।

योग की उपयोगिताः मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हमारे जीवन में योग अत्यन्त उपयोगी है। शरीर¸ मन एवं आत्मा के बीच सन्तुलन अर्थात् योग स्थापित करना होता है। योग की प्रक्रियाओं में जब तन¸ मन और आत्मा के बीच सन्तुलन एवं योग (जुड़ाव) स्थापित होता है तब आत्मिक सन्तुष्टि¸ शान्ति एवं चेतना का अनुभव होता है। योग शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है साथ ही तनाव से भी मुक्ति दिलाता है। यह शरीर के जोड़ों एवं मांसपेशियों में लचीलापन लाता है मांसपेशियों को मजबूत बनाता है शारीरिक विकृतियों को काफी हद तक ठीक करता है शरीर में रक्त-प्रवाह को सुचारू करता है तथा पाचन-तन्त्र को मजबूत बनाता है। इन सबके अतिरिक्त यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्तियाँ बढ़ाता है कई प्रकार की बीमारियों जैसे अनिद्रा¸ तनाव¸ थकान¸ उच्च रक्तचाप¸ चिन्ता इत्यादि को दूर करता है तथा शरीर को ऊर्जावान बनाता है। आज की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में स्वस्थ रह पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अतः हर आयु-वर्ग के स्त्री-पुरूष के लिए योग उपयोगी है।

योग के सामान्य नियमः योगासन उचित विधि से ही करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि की सम्भावना रहती है। योगासन के अभ्यास से पूर्व उसके औचित्य पर भी विचार कर लेना चाहिए। बुखार से ग्रस्त तथा गम्भीर रोगियों को योगासन नहीं करना चाहिए। योगासन करने से पहले नीचे दिए सामान्य नियमों की जानकारी होनी आवश्यक है

प्रातः काल शौचादि से निवृत्त होकर ही योगासन का अभ्यास करना चाहिए। स्नान के बाद योगासन करना और भी उत्तम रहता है।

सायंकाल खाली पेट पर ही योगासन करना चाहिए।

योगासन के लिए शान्त¸ स्वच्छ तथा खुले स्थान का चयन करना चाहिए। बगीचे अथवा पार्क में योगासन करना अधिक अच्छा रहता है।

आसन करते समय कम¸  हलके तथा ढीले-ढाले वस्त्र पहनने चाहिए।

योगासन करते समय मन को प्रसन्न¸ एकाग्र और स्थिर रखना चाहिए। कोई बातचीत नहीं करनी चाहिए।

योगासन के अभ्यास को धीरे-धीरे ही बढ़ाएँ।

योगासन का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को हलका¸ शीघ्र पाचक¸ सात्विक और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

अभ्यास के आरम्भ में सरल योगासन करने चाहिए।

योगासन के अन्त में शिथिलासन अथवा शासन करना चाहिए। इससे शरीर को विश्राम मिल जाता है तथा मन शान्त हो जाता है।

योगासन करने के बाद आधे घण्टे तक न तो स्नान करना चाहिए और न ही कुछ खाना चाहिए।

योग से लाभ­ : छात्रों¸ शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए योग विशेष रूप से लाभदायक सिद्ध होता है क्योंकि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी एकाग्रता भी बढ़ाता है जिससे उनके लिए अध्ययन-अध्यापन की प्रक्रिया सरल हो जाती है।

पतंजलि के योग- सूत्र के अनुसार आसनों की संख्या 84 है। जिनमें भुजंगासन¸ कोणासन¸ पद्मासन¸ मयूरासन¸ शलभासन¸ धनुरासन¸ गोमुखासन¸ सिंहासन¸ बज्रासन¸ स्वस्तिकासन¸ पर्वतासन¸ श्वासन¸ हलासन¸ शीर्षासन¸ ताड़ासन¸ सर्वांगासन¸ पश्चिमोत्तानासन¸ चतुष्कोणासन¸ त्रिकोणामन¸ मत्स्यासन¸ गरूड़ासन इत्यादि कुछ प्रसिद्ध आसन हैं। योग के द्वारा शरीर पुष्ट होता है बुद्धि और तेज बढता है अंग-प्रत्यंग में उष्ण रक्त प्रवाहित होने से स्फूर्ति आती है मांसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं पाचन-शक्ति ठीक रहती है तथा शरीर स्वस्थ और हल्का प्रतीत होता है। योग के साथ मनोरंजन का समावेश होने से लाभ द्विगुणित होता है। इससे मन प्रफुल्लित रहता है और योग की थकावट भी अनुभव नहीं होती। शरीर स्वस्थ होने से सभी इन्द्रियाँ सुचारू रूप से काम करती हैं। योग से शरीर नीरोग¸ मन प्रसन्न और जीवन सरस हो जाता है।

उपसंहार : आज की आवश्यकता को देखते हुए योग शिक्षा की बेहद आवश्यकता है क्योंकि सबसे बड़ा सुख शरीर का स्वस्थ होना है। यदि आपका शरीर स्वस्थ है तो आपके पास दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। स्वस्थ व्यक्ति ही देश और समाज का हित कर सकता है। अतः आज की भाग-दौड़ की जिन्दगी में खुद को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखने के लिए योग बेहद आवश्यक है। वर्तमान परिवेश में योग न सिर्फ हमारे लिए लाभकारी है बल्कि विश्व के बढ़ते प्रदूषण एवं मानवीय व्यस्तताओं से उपजी समस्याओं के निवारण के संदर्भ में इसकी सार्थकता और बढ़ गई है।  


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नियमित योग करने वाले व्यक्तियों के लिए योग बहुत अच्छा अभ्यास है। यह स्वस्थ जीवन शैली और हमेशा के लिए बेहतर जीवन जीने में सहायता करता है। हमें अपने बच्चों को योग के लाभों को बताने के साथ ही उन्हें योग करने का नियमित अभ्यास भी कराना चाहिए। योग पर निबंध एक सामान्य विषय है, जो विद्यार्थियों को निबंध लेखन प्रतियोगिता के दौरान निबंध लिखने के लिए दिया जा सकता है। योग और इसके लाभों पर उपलब्ध इस तरह के साधारण निबंधोंका प्रयोग आप अपने बच्चों में निबंध लिखने के कौशल को बढ़ावा देने के लिए कर सकते हैं। इस प्रकार के योग पर निबंध आपके बच्चे के स्वास्थ्य के साथ ही उनके हिन्दी में लिखने के कौशल को बढ़ावा देंगे।

योग पर निबंध (योग एस्से)

You can get below some essays on Yoga in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 350, and 500 words.

योग पर निबंध 1 (100 शब्द)

योग एक प्राचीन कला है जिसकी उत्पत्ति भारत में लगभग 6000 साल पहले हुई थी। पहले समय में, लोग अपने दैनिक जीवन में योग और ध्यान, पूरे जीवनभर स्वस्थ और ताकतवर बने रहने के लिए किया करते थे। फिर भी, इस भीड़ वाले व्यस्त वातावरण में योग करना दिन प्रति दिन कम होता जा रहा है। योग बहुत ही सुरक्षित क्रिया है और किसी के भी द्वारा किसी भी समय की जा सकती है, यहाँ तक कि इससे बच्चे भी लाभ ले सकते हैं। योग वह क्रिया है, जिसके अन्तर्गत शरीर के विभिन्न भागों को एक साथ लाकर शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को सन्तुलित करने का एक अभ्यास है। पहले समय में, योग का अभ्यास ध्यान की क्रिया के साथ किया जाता था।

योग पर निबंध 2 (150 शब्द)

योग शरीर और मस्तिष्क को एक साथ सन्तुलित करके प्रकृति से जुड़ने का सबसे सुरक्षित माध्यम है। यह व्यायाम का एक प्रकार है, जिसमें शरीर के संतुलन और आहार, सांस की क्रिया के साथ ही शारीरिक आकृति को भी नियंत्रित करना आवश्यक है।यह शरीर और मस्तिष्क को ध्यान से जोड़ता है और जिसके माध्यम से शरीर को आराम मिलता है। यह शरीर और मस्तिष्क के ऊपर नियंत्रण रखने के साथ ही तनाव और चिन्ता को कम करके शरीर और मस्तिष्क के अच्छे स्वास्थ्य को प्राप्त करने में मदद करता है।

योग किसी के भी द्वारा विशेषरुप से किशोरों और वयस्कों द्वारा जीवन के लिए आवश्यक सक्रियता के लिए दैनिक आधार पर व्यायाम के रुप में किया जा सकता है। यह जीवन के कठिन समय, स्कूल, मित्र, परिवार और पड़ोसियों के दबाव को कम करने में मदद करता है। योग के माध्यम से एक व्यक्ति दूसरों के द्वारा दी जाने वाली समस्याओं और तनावों को गायब कर सकता है। यह शरीर, मस्तिष्क और प्रकृति के बीच में आसानी से संपर्क स्थापित कराता है।

योग पर निबंध 3 (200 शब्द)

योग सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शरीर और मस्तिष्क के संबंधों में सन्तुलन बनाने में मदद करता है। यह व्यायाम का प्रकार है जो, नियिमित अभ्यास के माध्यम से शारीरिक और मानसिक अनुशासन सीखने में मदद करता है। इसकी बहुत समय पहले भारत में उत्पत्ति हुई थी। पहले समय में, बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म से जुड़े लोग योग और ध्यान का प्रयोग करते थे। योग के बहुत से प्रकार है; जैसे- राज योग, जन योग, भक्ति योग, कर्म योग, हस्त योग। आमतौर पर, हस्त योग के अन्तर्गत बहुत से आसनों का भारत में अभ्यास किया जाता है। योग से होने वाले लाभों और फायदों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए, हरेक साल विश्व स्तर पर एक आयोजन किया जाता है, उसे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कहा जाता है।

अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस की घोषणा (संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा में) 21 जून को, भारत की पहल और सुझाव के बाद की गयी। योग में प्राणायाम और कपाल-भाति योग क्रियाएं शामिल हैं, जो सबसे ज्यादा प्रभावी सांस की क्रियाएं हैं। इनका नियमित अभ्यास करने से लोगों को सांस संबंधी समस्याओं और उच्च व निम्न रक्तदाब जैसी बीमारियों में आराम मिलता है। योग वो इलाज है, यदि इसका प्रतिदिन नियमित रुप से अभ्यास किया जाए, तो यह बीमारियों से धीरे-धीरे झुटकारा पाने में मदद करता है। यह हमारे आन्तरिक शरीर में कुछ सकारात्मक बदलाव लाता है और शरीर के अंगों की प्रक्रिया को नियमित करता है। विशेष प्रकार के योग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं, इसलिए केवल आवश्यक और सुझाये गए योग का ही अभ्यास करना चाहिए।


 

योग पर निबंध 4 (250 शब्द)

योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में, योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द से हुई है, जिसके दो अर्थ हैं – एक अर्थ है; जोड़ना और दूसरा अर्थ है – अनुशासन। योग का अभ्यास हमें शरीर और मस्तिष्क के जुड़ाव द्वारा शरीर और मस्तिष्क के अनुशासन को सिखाता है। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जो शरीर और मस्तिष्क के संतुलन के साथ ही प्रकृति के करीब आने के लिए ध्यान के माध्यम से किया जाता है। यह पहले समय में, हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों द्वारा किया जाता था। यह व्यायाम का ही एक अद्भुत प्रकार है, जो शरीर और मन को नियंत्रित करके जीवन को बेहतर बनाता है। योग हमेशा स्वस्थ जीवन जीने का एक विज्ञान है। यह एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगों के कार्यों करने के ढ़ंग को नियमित करके विभिन्न बीमारियों को धीरे-धीरे ठीक करता है।

वास्तव में, योग वह क्रिया है, जो शरीर के अंगों की गतिविधियों और सांसों को नियंत्रित करता है। यह शरीर और मन, दोनों को प्रकृति से जोड़कर आन्तरिक और बाहरी ताकत को बढ़ावा देता है। यह केवल शारीरिक क्रिया नहीं है, क्योंकि यह एक मनुष्य को मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक विचारों पर नियंत्रण करने के योग्य बनाता है। इसका अभ्यास लोगों के द्वारा किसी भी आयु में किया जा सकता है, जैसे- बचपन, किशोरावस्था, वयस्क या वृद्धावस्था। इसके लिए नियंत्रित सांस के साथ सुरक्षित, धीमें और नियंत्रित शारीरिक गतिविधियों की आवश्यकता होती है। योग और इसके लाभों के बारे में दुनियाभर के लोगों को जागरुक करने के लिए वार्षिक रुप से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस) कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

योग पर निबंध 5 (350 शब्द)

योग प्राचीन समय से मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया बहुत ही महत्वपूर्ण और अनमोल उपहार है, जो जीवन भर मनुष्य को प्रकृति के साथ जोड़कर रखता है। यह शरीर और मस्तिष्क के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए, इन दोनों को संयुक्त करने का सबसे अच्छा अभ्यास है। यह एक व्यक्ति को सभी आयामों पर, जैसे- शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर नियंत्रण के द्वारा उच्च स्तर की संवेदनशीलता प्रदान करता है। स्कूल और कॉलेज में विद्यार्थियों की बहतरी के साथ ही पढ़ाई पर उनकी एकाग्रता को बढ़ाने के लिए योग के दैनिक अभ्यास को बढ़ावा दिया जाता है। यह लोगों द्वारा किया जाने वाला व्यवस्थित प्रयास है, जो पूरे शरीर में उपस्थित सभी अलग-अलग प्राकृतिक तत्वों के अस्तित्व पर नियंत्रण करके व्यक्तित्व में सुधार लाने के लिए किया जाता है।

योग के सभी आसनों से लाभ प्राप्त करने के लिए सुरक्षित और नियमित अभ्यास की आवश्यकता है। योग का अभ्यास आन्तरिक ऊर्जा को नियंत्रित करने के द्वारा शरीर और मस्तिष्क में आत्म-विकास के माध्यम से आत्मिक प्रगति को लाना है। योग के दौरान श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन लेना और छोड़ना सबसे मुख्य वस्तु है। दैनिक जीवन में योग का अभ्यास करना हमें बहुत सी बीमारियों से बचाने के साथ ही भयानक बीमारियों; जैसे- कैंसर, मधुमेह (डायबिटीज़), उच्च व निम्न रक्त दाब, हृदय रोग, किडनी का खराब होना, लीवर का खराब होना, गले की समस्याओं और अन्य बहुत सी मानसिक बीमारियों से भी बचाव करता है।

आजकल, लोगों के जीवन को बेहतर करने के लिएफिर से योग का अभ्यास करने की आवश्यकता है। दैनिक जीवन में योग का अभ्यास शरीर को आन्तरिक और बाहरी ताकत प्रदान करता है। यह शरीर के प्रतिरोधी प्रणाली को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है, इस प्रकार यह विभिन्न और अलग-अलग बीमारियों से बचाव करता है। यदि योग को नियमित रुप से किया जाए तो यह दवाईयों का दूसरा विकल्प हो सकता है। यह प्रतिदिन खाई जाने वाली भारी दवाईयों के दुष्प्रभावों को भी कम करता है। प्राणायाम और कपाल-भाति जैसे योगों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का समय है, क्योंकि यह शरीर और मन पर नियंत्रण करने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करता है।


 

योग पर निबंध 6 (500 शब्द)

बिना किसी समस्या के जीवन भर तंदरुस्त रहने का सबसे अच्छा, सुरक्षित, आसान और स्वस्थ तरीका योग है। इसके लिए केवल शरीर के क्रियाकलापों और श्वास लेने के सही तरीकों का नियमित अभ्यास करने की आवश्यकता है। यह शरीर के तीन मुख्य तत्वों; शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के बीच संपर्क को नियमित करना है। यह शरीर के सभी अंगों के कार्यकलाप को नियमित करता है और कुछ बुरी परिस्थितियों और अस्वास्थ्यकर जीवन-शैली के कारण शरीर और मस्तिष्क को परेशानियों से बचाव करता है। यह स्वास्थ्य, ज्ञान और आन्तरिक शान्ति को बनाए रखने में मदद करता है। अच्छे स्वास्थ्य प्रदान करने के द्वारा यह हमारी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करता है, ज्ञान के माध्यम से यह मानसिक आवश्यकताओं को पूरा करता है और आन्तरिक शान्ति के माध्यम से यह आत्मिक आवश्यकता को पूरा करता है, इस प्रकार यह हम सभी के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।

सुबह को योग का नियमित अभ्यास हमें अनगिनत शारीरिक और मानसिक तत्वों से होने वाली परेशानियों को दूर रखने के द्वारा बाहरी और आन्तरिक राहत प्रदान करता है। योग के विभिन्न आसन मानसिक और शारीरिक मजबूती के साथ ही अच्छाई की भावना का निर्माण करते हैं। यह मानव मस्तिष्क को तेज करता है, बौद्धिक स्तर को सुधारता है और भावनाओं को स्थिर रखकर उच्च स्तर की एकाग्रता में मदद करता है। अच्छाई की भावना मनुष्य में सहायता की प्रकृति के निर्माण करती है और इस प्रकार, सामाजिक भलाई को बढ़ावा देती है। एकाग्रता के स्तर में सुधार ध्यान में मदद करता है और मस्तिष्क को आन्तरिक शान्ति प्रदान करता है। योग प्रयोग किया गया दर्शन है, जो नियमित अभ्यास के माध्यम से स्व-अनुशासन और आत्म जागरुकता को विकसित करता है।

योग का अभ्यास किसी के भी द्वारा किया जा सकता है, क्योंकि आयु, धर्म या स्वस्थ परिस्थितियों परे है। यह अनुशासन और शक्ति की भावना में सुधार के साथ ही जीवन को बिना किसी शारीरिक और मानसिक समस्याओं के स्वस्थ जीवन का अवसर प्रदान करता है। पूरे संसार में इसके बारे में जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने, संयुक्त संघ की सामान्य बैठक में 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाने की घोषणा करने का सुझाव दिया था, ताकि सभी योग के बारे में जाने और इसके प्रयोग से लाभ लें। योग भारत की प्राचीन परम्परा है, जिसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी और योगियों के द्वारा तंदरुस्त रहने और ध्यान करने के लिए इसका निरन्तर अभ्यास किया जाता है। निक जीवन में योग के प्रयोग के लाभों को देखते हुए संयुक्त संघ की सभा ने 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस के रुप में मनाने की घोषणा कर दी है।

हम योग से होने वाले लाभों की गणना नहीं कर सकते हैं, हम इसे केवल एक चमत्कार की तरह समझ सकते हैं, जिसे मानव प्रजाति को भगवान ने उपहार के रुप में प्रदान किया है। यह शारीरिक तंदरुस्ती को बनाए रखता है, तनाव को कम करता है, भावनाओं को नियंत्रित करता है, नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करता है और भलाई की भावना, मानसिक शुद्धता, आत्म समझ को विकसित करता है साथ ही प्रकृति से जोड़ता है।


 

हम योग पर विभिन्न शब्द सीमाओं में विद्यार्थियों की जरुरत और आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध करा रहे हैं। योग पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 या इससे ऊपरी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के द्वारा प्रयोग किए जा सकते हैं।


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